उत्तराधिकार - प्रत्येक रविवार

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उत्तराधिकार में हुईं उपशास्त्रीय गायन एवं केरला नदनम नृत्य की प्रस्तुतियाँ (15/07/18)

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में परम्परा, प्रदर्शनकारी कला एवं नवांकुरों के लिए स्थापित श्रृंखला 'उत्तराधिकार' में आज 'उपशास्त्रीय गायन' एवं 'केरला नदनम नृत्य' की प्रस्तुतियाँ संग्रहालय सभागार में हुईं|

उपशास्त्रीय गायन की शुरुआत सिद्धार्थ पराशर ने अपने साथी कलाकारों के साथ तानसेन द्वारा रचित राग मियां की मल्हार से की| इसके पश्चात् विलंबित एक ताल में निबद्ध 'करीम नाम तेरो' तत्पश्चात् द्रुत तीन ताल में निबद्ध पंडित एस.एस कोरवार द्वारा रचित 'न दिर दिरता' प्रस्तुत किया| इसी क्रम में मध्य लय 'राग चारुकेशी' में 'पार करो मोरे साईं' और 'राग देस' में गुरु पंडित सिधाराम स्वामी द्वारा रचित विरह ठुमरी 'पिया बिन बैनन नींद नहीं आवे' प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया| सिद्धार्थ पराशर ने 16 वीं शताब्दी के लोकप्रिय संगीतकार सूरदास द्वारा रचित 'चारा कमल वंदु हरि राय' प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया| प्रस्तुति के दौरान सिद्धार्थ पराशर का साथ गायन में मुदित चतुर्वेदी और रजत शर्मा ने दिया| इस प्रस्तुति में संगतकारों में तानपुरे पर आकाश ने, तबले पर अशेष उपाध्याय ने और हारमोनियम पर माजिद खान ने सिद्धार्थ पराशर का साथ दिया|

गायन के पश्चात् जॉयकृष्णन ने अपने साथी कलाकारों के साथ 'केरला नदनम नृत्य' की शुरुआत 'गणेश स्तुति' के साथ पुष्पांजलि से की| गणेश स्तुति के पश्चात् राग अरभी में पुष्पांजलि के साथ कीर्थनम प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति के बाद राग मलिका में 'पांचाली चर्थम' प्रस्तुत किया| पांचाली चर्थम में द्रुपद की कन्या द्रौपदी के स्वयंवर को मंच पर प्रस्तुत किया गया| जॉयकृष्णन ने अपनी नृत्य प्रस्तुत का अंत महाभारत कालीन हिंडिबा की कथा पर नृत्य प्रस्तुत कर किया| इस कथा के अनुसार, जब वनवास काल में पांडवों का घर (लाक्षागृह) जला दिया गया, तो विदुर के परामर्श पर वे वहां से भागकर एक दूसरे वन में गए| जहाँ पीली आँखों वाला हिडिंब राक्षस अपनी बहन हिंडिबा के साथ रहता था। एक दिन हिडिंब ने अपनी बहन हिंडिबा को वन में भोजन की तलाश करने के लिये भेजा, परन्तु वहां हिंडिबा ने पाँचों पाण्डवों सहित उनकी माता कुन्ति को देखा। इस राक्षसी ने जब भीम को देखा तो उसे प्रेम हो गया, इस कारण उसने उन सबको नहीं मारा जिससे हिडिंब बहुत क्रोधित हो गया और हिडिंब ने पाण्डवों पर हमला कर दिया| इस युद्ध में भीम ने हिडिंब को मार डाला| अतः जंगल में कुंती की आज्ञा से हिंडिबा एवं भीम दोनों का विवाह हुआ। इन्हें घटोत्कच नामक पुत्र हुआ। नृत्य प्रस्तुति में मंच पर जॉयकृष्णन का साथ अर्धं अशोक, अदिति.एस.अनिल, गोपिका, अभिजीत, रश्मि.आर.एस, सदनं राशीद और रामदास भास्कर ने दिया|

प्रस्तुतियों के दौरान श्रोताओं एवं दर्शकों ने कई बार कलाकारों का उत्साह वर्धन करतल ध्वनि से किया|
सिद्धार्थ पराशर ने गायन की शिक्षा गुरु पंडित सिद्धारमा स्वामी कोर्वर से प्राप्त की| सिद्धार्थ पराशर को कला क्षेत्र के कई सम्मानों और पुरस्कारों से भी पुरस्कृत किया जा चुका है| इन्होंने देश के विभिन्न कला मंचों पर अपने गायन की प्रस्तुतियाँ दी हैं| जिनमें 2013 में भारत भवन, भोपाल और पंचम निषाद संगीत समारोह, इंदौर आदि प्रमुख हैं|
जॉयकृष्णन ने भरतनाट्यम नृत्य की शिक्षा लेना 5 वर्ष की छोटी आयु से ही प्रारंभ कर दिया था| जॉयकृष्णन को उनके नृत्य कौशल के लिए कई सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है| जिनमें नाट्य श्री, करुर नृत्यांजलि, कल्पाश्री आदि सम्मान प्रमुख हैं| इन्होंने देश-विदेश के विभिन्न कला मंचों पर केरला नदनम नृत्य की प्रस्तुतियाँ दी हैं|


जुलाई, 2018 में होने वाले कार्यक्रम

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