उत्तराधिकार - प्रत्येक रविवार

उत्तराधिकार - प्रत्येक रविवार

“उत्तराधिकार” श्रृंखला अन्तर्गत ‘‘उपशास्त्रीय गायन’’ एवं ‘‘कुचिपुड़ि युगल नृत्य‘‘ का प्रदर्शन हुआ

‘‘उत्तराधिकार’’ श्रृंखला के अंतर्गत रविवार 26 मार्च को किराना घराने की सुश्री श्रद्धा जैन, मुम्बई द्वारा उप-शास्त्रीय गायन तथा सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री राजश्री दास, बैंगलोर एवं सुश्री श्वेता नायक, भिलाई द्वारा भगवान कृ-ुनवजयण की लीलाओं पर केन्द्रित ‘‘कुिचपुड़ि युगल नृत्य‘‘ का प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राजेश रेड्डी की गजल ‘रंग मौसम का हरा था पहले .. .’ से शुरू हुआ। तत्पश्च्यात ‘वही बाम-ंउचयओदर की उदासियां.. .. , होठों पे मोहब्बत के फसाने नहीं आते.. .,मेरे चेहरे पे जब चेहरा नहीं था.. ., मुझे फिर वही याद आने लगे हैं.. . और मुस्कुराये जा रहे हो.. .. जैसी मशहूर गजलों को छाया नट, मधुवंती, जोग और शुद्ध सारंग जैसे विविध रागों में प्रस्तुत किया ।

इसके साथ ही इन्हीं रागो पर आधारित बंदिश पेश की। अंत में द्रुत एक ताल में निबद्ध राग मालकौंस में ताराना की प्रभावी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ हारमोनियम पर जमीर हुसैन, तबले पर मनोज भाटी, गिटार पर अरशद अहमद और वायलिन पर एम. राशिद ने संगत दी।कार्यक्रम के दूसरे चरण में सुप्रसिद्ध नृत्यांगना राजश्री एवं श्वेता नायक ने गुरूको समर्पित राग तिलंग पर आधारित ‘श्री गणेश शरणम्’ की प्रस्तुति दी। तत्पश्च्यात कवि पुरन्दर दास की वात्सल्य रचना पर आधारित कृ-ुनवजयण की शैशव सौन्दर्यपूर्ण रचना को राग कापि पर अनुपम मुद्राओं से अभिव्यक्त कर दर्शकों को आत्मविभोर कर दिया।

तत्पश्च्यात, वृन्दावन की बसंतोत्सव सहित कंस वध, कालिका मर्दन, गोवर्धन प्र्रसंगों को राग मालिका व ताल आदि पर युगल नृत्यों की मनोहारी और प्रभावी प्रस्तुति दी।

मार्च 2017 के कार्यक्रम

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