उत्तराधिकार - प्रत्येक रविवार

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उत्तराधिकार में हुईं उपशास्त्रीय गायन एवं भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुतियाँ (16/09/2018)

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में परम्परा, प्रदर्शनकारी कला एवं नवांकुरों के लिए स्थापित श्रृंखला 'उत्तराधिकार' में आज 'उपशास्त्रीय गायन' एवं 'भरतनाट्यम नृत्य' की प्रस्तुतियाँ संग्रहालय सभागार में हुईं

कार्यक्रम की शुरुआत ग्वालियर घराने के उमेश कम्पूवाले ने अपने साथी कलाकार के साथ उपशास्त्रीय गायन से की| जिसमें उन्होंने राग पुरिया में 'मैं तो कर आई रंग रेलियाँ' और एक ताल में 'पिया संग लागी लगन मौरी आज' प्रस्तुत किया| इसके पश्चात देस राग में ठुमरी 'कैसे कटे दिन और रतियाँ' और 'तुमसे लागे मोरे नयन' प्रस्तुत किया| उमेश कम्पूवाले ने अपनी प्रस्तुति का अंत राग मिश्र भैरवी में ठुमरी 'आज मिलो एक बार सजनवां' प्रस्तुत कर दर्शकों को मोह लिया और अपनी प्रस्तुति को विराम दिया| इस प्रस्तुति में संगतकारों में उमेश कम्पूवाले का साथ गायन में आरोह कम्पूवाले ने, हारमोनियम पर जीतेन्द्र शर्मा ने और तबले पर आशीष उपाध्याय ने साथ दिया|

गायन के पश्चात् आनन्दा शंकर जयंत ने अपने साथी कलाकारों के साथ 'भरतनाट्यम नृत्य' प्रस्तुति की शुरुआत गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुत करते हुए की| गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुति के पश्चात राग ताल मलिका में 'देवी उपासकम' पर कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति में मीनाक्षी देवी और दुर्गा माँ का यशो गान किया गया और देवियों के विभिन्न रूपों को मंच पर बिम्बित किया गया, नृत्य के सहारे| देवी उपासकम के पश्चात आनन्दा शंकर जयंत ने मीरा भजन 'तुम बिन मोरे कौन प्रभु रे' पर एकल नृत्य प्रस्तुति प्रस्तुत कर सभागार में मौजूद सभी दर्शकों को भाव से भर दिया| एकल प्रस्तुति के बाद नाट्य भैरवी में तिल्लाना पर नृत्य प्रस्तुति हुई| आनन्दा शंकर जयंत ने साथी कलाकारों के साथ राग ताल मलिका में 'शिवोहम' पर नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया| इस प्रस्तुति की शुरुआत में शिव को और शक्ति के रूपों को और उनके यशो गान को नृत्य माध्यम से मंच पर प्रस्तुत किया गया| इसके बाद शिव और शक्ति के अर्द्धनारीश्वर स्वरुप को कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति में आनन्दा शंकर जयंत का साथ मंच पर चेलन, हर्षिता, पूजिता नम्बूरी, अनुषा नम्बूरी, नेहा सत्तनापल्ली, अर्चिता भट्ट, सहना सुंदै और श्रीविद्या श्रीपति आदि ने साथ दिया| इस प्रस्तुति में प्रकाश परिकल्पना में य. बसवराजु ने, ध्वनि एवं मेकअप में नीरजा क़ज़ा ने सहयोग किया|

प्रस्तुतियों के दौरान कई बार कलाकारों का उत्साह वर्धन दर्शकों और श्रोताओं ने करतल ध्वनि से किया|

उमेश कम्पूवाले ने देश के विभिन्न कला मंचों पर अपने गायन की प्रस्तुतियाँ दी हैं| आनन्दा शंकर जयंत को पद्मश्री सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों और पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है| आनन्दा शंकर जयंत ने देश-विदेश के विभिन्न कला मंचों पर नृत्य की कई मोहक प्रस्तुतियाँ दी हैं|


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