सिद्धा

सिद्धा - शक्ति की महिमा पर केन्द्रित - (12 से 14 अक्टूबर, 2018)

शक्ति की महिमा पर केन्द्रित समारोह सिद्धा में आज हुईं गायन और नृत्य की प्रस्तुतियाँ (14/10/18)

संस्कृति विभाग द्वारा और आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के संयोजन से मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में शक्ति की महिमा पर केन्द्रित तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह 'सिद्धा' में आज देव ध्वनि नृत्य और दुर्गा स्तुति एवं ओडिसी शैली में भवप्रीता देवी के स्वरुप पर आधारित नृत्याभिनय की प्रस्तुतियाँ संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर हुईं|

कार्यक्रम की शुरुआत मोनीकुन्तला भयाँ ने साथी कलाकारों के साथ 'दुर्गा स्तुति' से की| दुर्गा स्तुति के बाद देव ध्वनि नृत्य की शुरुआत 'शिव तांडव' से हुई, जिसमें शिव के उग्र स्वरुप को मंच पर कलाकारों ने अपने नृत्याभिनय कौशल से प्रस्तुत किया| इसके बाद कलाकारों ने पारम्परिक 'सलोनी नृत्य' प्रस्तुत किया| इस नृत्य शैली में बेउला के पति लिखेंदर की मृत्य हो जाती है| अतः बेउला माँ मनसा की उपासना कर उन्हें प्रसन्न करती है और अपने पति को पुनः पा लेती है| मोनीकुन्तला भयाँ ने अपने साथी कलाकारों के साथ 'रणचण्डी' में देवी के उग्र स्वरुप को प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया| रणचण्डी में कलाकारों ने अपने कला कौशल से देवी के उग्र रूप को बिम्बित किया और देवी किस तरह राक्षसों और दुष्टों का संघार कर रही हैं, यह मंच पर प्रस्तुत किया|

प्रस्तुति के दौरान मंच पर मोनीकुन्तला भयाँ, संगीता राभा, प्रतिष्ठा मजूमदार, प्रियंका नाथ, ऋतु पूर्णिमा और धरित्री ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को भक्ति भाव से भर दिया| मोनीकुन्तला भयाँ का साथ गायन में बापूजी कुंवर और संगीता राभा ने, सिम्बल पर संगीता राभा और देबजीत मजूमदार ने, कंजरी पर मोनीकुन्तला ने सहयोग दिया| प्रस्तुति के दौरान सूत्रधार तौर पर कुकी मजूमदार ने सहयोग किया|

दूसरी प्रस्तुति में मीरादास ने अपने साथी कलाकारों के साथ ओडिसी शैली में देवी स्वरुप आधारित नृत्य प्रस्तुत किया| जिसमें उन्होंने देवी स्तुति 'नमो देवी महा देवी' से अपने नृत्य को प्रारम्भ करते हुए देवी के नौ स्वरूपों को मंच पर बिम्बित किया और देवी का यशो गान किया| मीरादास ने अपने साथी कलाकारों के साथ देवी के भवप्रीता स्वरुप का यशो गान अपने नृत्य कौशल से करते हुए अपनी प्रस्तुति को विराम दिया| इस प्रस्तुति में देवी भवप्रीता को भव अर्थात संसार के लिए प्रीता बताया गया| जिनके मनोहर रूप देख लेने पर, संसार की कोई वस्तु रमणीय नहीं जान पड़ती, इस अतुलनीय सौन्दर्य के कारण माँ विश्व का लक्ष्य बनती हैं, सभी माँ का आश्रय लेते हैं, इससे यह सूचित होता है कि माँ ही लक्ष्मी अथवा श्री शक्ति की आधार हैं| इस प्रस्तुति में मीरादास का साथ सुष्मिता, पुष्प, शिबानी, प्रियंका, बिद्या बिस्वजीत, पद्मिनी, स्वीकृति, भाग्यश्री, मुनमुन, स्वर्णमयी, प्रगति और संजीत कुमार ने अपने नृत्य कौशल से देवी स्वरुप को बड़ी ही ख़ूबसूरती से मंच पर प्रस्तुत किया|

प्रस्तुतियों के दौरान कई बार कलाकारों का उत्साहवर्धन श्रोताओं और दर्शकों ने करतल ध्वनि से किया|


सिद्धा - शक्ति की महिमा पर केन्द्रित

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