निर्गुण समारोह

निर्गुण समारोह

28 जून से 30 जून, 2018

समापन अवसर पर हुईं मालवी एवं बाउल गायन की प्रस्तुतियाँ

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में निराकार की संगीत उपासना पर केन्द्रित कार्यक्रम 'निर्गुण गान' के के सनापन अवसर पर जगदीश बोरियाला द्वारा मालवी गायन एवं लक्ष्मण दास द्वारा बाउल गायन की प्रस्तुतियाँ संग्रहालय सभागार में हुईं|

कार्यक्रम की शुरुआत जगदीश बोरियाला ने अपने साथी कलाकारों के साथ मालवी में कबीर के भजन 'संत द्वारे आयारी' गा कर की| इसके पश्चात् क्रमशः 'पीले अमिरस धारा गगन में', 'धन्य तेरी करताल कला का पार नहीं पाता' और 'म्हारा सतगुरु रंगरेज' प्रस्तुत किया| जगदीश बोरियाला ने अपनी प्रस्तुति का समापन 'मन लागो मेरो यार फकीरी में' और 'जरा हल्के गाड़ी हांको' आदि प्रस्तुत कर किया| इस प्रस्तुति में मुख्य गायक जगदीश बोरियाला का साथ गायन में काशी डामोर और मोहन पटेल ने दिया| संगतकारों में हारमोनियम पर रामप्रसाद परमार ने, ढोलक पर देविदास बैरागी ने, बांगो पर मनोज घुडावाद ने मंजीरे पर काशीराम और मोहन पटेल ने, वायलिन पर संतोष ने सधी हुई संगत से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया|

पहली प्रस्तुति के पश्चात् लक्ष्मण दास ने अपने साथी कलाकारों के साथ बाउल गायन की शुरुआत राधा श्याम दास द्वारा रचित बाउल वंदना 'झान तिमिरों, गुरु नाश करो' से की| इसके पश्चात् ललन फ़क़ीर द्वारा लिखित जात पात जैसी बुराइयों को संगीत के माध्यम से श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति में जीवन, चरित्र और मनुष्यता के विभिन्न आयामों को मंच पर गायन के माध्यम से लक्ष्मण दास ने प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति लक्ष्मण दास का साथ संगतकारों में श्री खोल पर नीति चन्द्र दास ने, बाँसुरी पर नव कुमार ने, हारमोनियम बुघन दास ने, एक तारा और पर बामा प्रसाद ने दिया|

जगदीश बोरियाला ने हिंदी साहित्य में एम.ए किया है| जगदीश बोरियाला कई वर्षों से संगीत में सक्रीय हैं| इन्होंने देश के विभिन्न कला मंचों पर अपने गायन की प्रस्तुतियाँ दी हैं| लक्ष्मण दास ने 7 वर्ष की आयु से ही ग्रहस्त जीवन को त्याग दिया था| लक्ष्मण दास ने बाउल गायन की शिक्षा गुरु सुधीर दास से प्राप्त की| इन्होंने देश के विभिन्न कला मंचों में अपने गायन की प्रस्तुति देने के साथ ही विदेशों के भी कई मंचों पर बाउल गायन की प्रस्तुतियाँ दी हैं|

प्रस्तुतियों के दौरान कई बार श्रोताओं ने दर्शकों का उत्साह वर्धन करतल ध्वनि से किया|

संग्रहालय में दीर्घाएँ

सांस्कृतिक वैविध्य

मध्यप्रदेश की विशिष्टता को स्थापित करने तथा उसकी बहुरंगी, बहुआयामी संस्कृति को बेहतर रूप से समझने और दर्शाने का कार्य दीर्घा क्रमांक-एक...

आगे पढें

जीवन शैली

दीर्घा-एक से दो में प्रवेश करने के लिए जिस गलियारे से गुजर कर जाना होता है, वहाँ एक विशालकाय अनाज रखने की कोठी बनाई गई है।...

आगे पढें

कलाबोध

कलाबोध दीर्घा में हमने जीवन चक्र से जुड़े संस्कारों तथा ऋतु चक्र से जुड़े गीत-पर्वों-मिथकों, अनुष्ठानों को समेटने का उद्देश्य रखा है।...

आगे पढें

देवलोक

संकेतों, प्रतीकों की जिस आशुलिपि में इस आदिवासी समुदाय ने अपने देवलोक के वितान को लिखा है, उसकी व्यापकता दिक्-काल की अनंत-असीम की ...

आगे पढें

अतिथि राज्य छत्तीसगढ़

अतिथि राज्य की आदिवासी संस्कृति को दर्शाती दीर्घा में सबसे पहले छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों के जीवन को प्रस्तुत किया जा रहा है।...

आगे पढें

प्रदर्शनी दीर्घा

दीर्घा में नीचे मध्य में बने मानचित्र पर मध्यप्रदेश में रहने वाली सभी प्रमुख जनजातियों की भौगोलिक उपस्थिति को सांकेतिक रूप से उनके महत्त्वपूर्ण ...

आगे पढें