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'लोकरंग' - इस बार- बी.एच.ई.एल. दशहरा मैदान, भोपाल (26 से 30 जनवरी, 2018), पारम्परिक कलाओं के उत्सव 'लोकरंग' के आयोजन का यह 33वाँ वर्ष है।
लोकरंग का 33 वाँ आयोजन 26 जनवरी, 2018

लोकरंग के बारे में

पारम्परिक कलाओं के उत्सव 'लोकरंग' के आयोजन का यह 33वाँ वर्ष है। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित होने वाला यह उत्सव, इस देश की जनता के असाधारण सौंदर्यबोध, कला चेतना और सर्जना का अनूठा साक्ष्य है । अरण्य क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोग, लोक सांस्कृतिक परम्परा की सामुदायिकता को किस तरह अक्षुण्य रखकर इसे एक जीवंत सांस्कृतिक परम्परा बनाते हैं - 'लोकरंग' इसका विलक्षण उदाहरण है ।

लोकरंग - 2018

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गणतंत्र दिवस के अवसर पर संस्कृति विभाग की ओर से हर वर्ष आयोजित किया जाने वाला प्रतिष्ठा समारोह लोकरंग इस बार भी 26 जनवरी से प्रारम्भ होने जा रहा है। भेल दशहरा मैदान में शाम सात बजे इसका शुभारम्भ प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल के मुख्य आतिथ्य में होगा। विगत वर्षों की तरह इस बार भी लोकरंग को विभिन्न आयामों में विन्यस्त किया गया है जिसमें प्रदर्शनकारी कलाओं के साथ साथ प्रदर्शनी, विभिन्न माध्यमों के शिल्पों का प्रदर्शन एवं विक्रय, प्रकाशन, पारम्परिक व्यंजन शामिल हैं।

समारोह का यह 33 वाँ साल है। पिछले कुछ सालों से लोकरंग में बच्चों के लिए एक अलग मौलिक विस्तार किया गया है जिसमें फिल्मों के प्रदर्शन होते रहे हैं। इस बार फिल्म प्रदर्शन के साथ बच्चों के लिए कहानी, चित्र एवं षिल्प निर्माण के अनौपचारिक प्रशिक्षण के साथ ही कलाकारों, शिल्पकारों, कथाकारों एवं फिल्मकारों से बातचीत भी रखी गयी है। यह आयोजन प्रतिदिन शाम से देर रात तक जारी रहेगा जबकि बच्चों की गतिविधियाँ 27 से 29 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे तक हुआ करेंगी। इसी प्रकार प्रदर्शनी एवं मेले का अवलोकन एवं क्रय दोपहर 12 बजे के बाद से किया जा सकेगा।

लोकरंग का आरम्भ इस बार भी लोकजीवन से जुड़ी एक कथा के भव्य मंचन के साथ होने जा रहा है। यह कथा भीली जनजाति की अत्यन्त गहरे पैठी पिथौरा की है। इसका मंचन लगभग दो सौ मंच पर एवं नेपथ्य कलाकारों की भागीदारी के साथ 26 जनवरी को शाम 7 बजे से होगा। इसका निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी एवं एनएसडी नई दिल्ली के प्रोफेसर लोकेन्द्र त्रिवेदी कर रहे हैं जबकि सूत्रधार की भूमिका में मध्यप्रदेश के ही गौरव कलाकार फिल्म अभिनेता गोविन्द नामदेव निबाह रहे हैं। पिथौरा भीली जनजीवन का आध्यात्म केन्द्रित आख्यान है जिसका चित्रांकन वहाँ के गुणी चित्रकार सदैव किया करते हैं।

लोकरंग के शेष दिनों में मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखण्ड, तमिलनाडु, नागालैण्ड, सिक्किम, जम्मू कश्मीर, मणिपुर, तमिलनाडु राज्यों के पारम्परिक कलाकारों के नृत्यों की प्रस्तुति हुआ करेगी। दर्शक विशेष रूप से सैला, कोलदहका, सपेरा, भवई, रूफ, मारुनी, धनगिरीगजा, करमा, डोंगरी, राई, कावड़ी कड़गम, झूमर, गणगौर आदि नृत्यों का आनंद ले सकेंगे। इसी आयोजन में अफ्रीका, रूस, चीन, फ्रांस आदि देशों के कलाकार भी गीत संगीतमय प्रस्तुति करेंगे।

भेल दशहरा मैदान में विगत वर्ष स्थानांतरित होने के बाद लोकरंग की व्यापकता और उसका दायरा और विस्तारित तथा समृद्ध हो गया है। विगत वर्ष का यह अनुभव रहा है कि और अधिक संख्या में शहरवासी, कलाप्रेमी और जिज्ञासु वहाँ आये और अधिक सहूलियत और सुविधापूर्ण तरीके से उन्होंने अवलोकन, भ्रमण किया तथा प्रदर्शनों का आनंद लिया।