महत्वपूर्ण-

'लोकरंग' - इस बार- बी.एच.ई.एल. दशहरा मैदान, भोपाल (26 से 30 जनवरी, 2017), पारम्परिक कलाओं के उत्सव 'लोकरंग' के आयोजन का यह 32वाँ वर्ष है।

लोकरंग के बारे में

पारम्परिक कलाओं के उत्सव 'लोकरंग' के आयोजन का यह 32वाँ वर्ष है। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित होने वाला यह उत्सव, इस देश की जनता के असाधारण सौंदर्यबोध, कला चेतना और सर्जना का अनूठा साक्ष्य है । अरण्य क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोग, लोक सांस्कृतिक परम्परा की सामुदायिकता को किस तरह अक्षुण्य रखकर इसे एक जीवंत सांस्कृतिक परम्परा बनाते हैं - 'लोकरंग' इसका विलक्षण उदाहरण है ।

लोकरंग - 2017

पारम्परिक कलाओं के उत्सव 'लोकरंग' के आयोजन का यह 32वाँ वर्ष है। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित होने वाला यह उत्सव, इस देश की जनता के असाधारण सौंदर्यबोध, कला चेतना और सर्जना का अनूठा साक्ष्य है । अरण्य क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोग, लोक सांस्कृतिक परम्परा की सामुदायिकता को किस तरह अक्षुण्य रखकर इसे एक जीवंत सांस्कृतिक परम्परा बनाते हैं - 'लोकरंग' इसका विलक्षण उदाहरण है ।

लोकजीवन और परम्परा तथा लोक संस्कृति, भारतीय संस्कृति का मूलाधार है। लोक परम्परा के गीत, संगीत नृत्य, नाट्य, चित्र और शिल्प परम्परा घनिष्टता से जुड़े हैं - लोक आस्था, लोक मूल्यों, लोक अनुष्ठानों, लोक धार्मिक-आध्यात्मिक पद्दतियों, लोक और जनजातीय देवताओं, प्रकृति एवं पर्वों-त्योहारों के अवसर को समारोहित करने वाले कला संसार से भारतीय 'एकता तथा रहस्यमयी और सुदृढ़ सूत्र जो' रहने और जीने की शताधिक विविधताओं' में प्रकट होता - 'कलाओं का विश्व समारोह' है। हर साल अपने देश के गणतंत्र को 'समारोहित' करने और उसे एक 'लोकपर्व' जैसी 'आत्मीयता' प्रदान करने हम संस्कृति के इसी भारतीय अंतरंग को 'लोकरंग' में प्रकट करते हैं।