लोकरंग - 2019

लोकरंग के दूसरे दिन निमाड़ी, पंडवानी गायन और सिम्फनी ऑफ रोमानिया, बैंड (27/01/19)


लोकरंग - 26/01/19 | लोकरंग - 27/01/19 | लोकरंग - 28/01/19 | लोकरंग - 29/01/19 |


गणतंत्र झाँकी में सराहनीय प्रदर्शन करने वाले स्पेशल बच्चे लोकरंग में सम्मानित

गणतंत्र दिवस की सुबह जब सर्द हवा और कोहरा छाया हुआ था, लाल परेड ग्राउण्ड में झाँकियों के प्रदर्शन के समय सामाजिक न्याय विभाग की झाँकी में आगे-आगे बैण्ड वादन करते हुए राष्ट्रवंदना की धुन पर मार्च पास्ट करते हुए लम्बी दूरी की परिक्रमा कर रहे बच्चों ने राज्यपाल सहित उपस्थित सभी का ध्यान आकृष्ट किया। ये शालोम स्पेशल स्कूल के विशेष बच्चे थे जिन्होंने धुन, लगन और अपने भीतर की असाधारण क्षमता का परिचय देते हुए पूरी परेड में गजब का अनुशासन प्रस्तुत किया। संस्कृति सचिव रेनू तिवारी ने इन बच्चों की जिजीविषा को सराहते हुए इन्हें विशेष रूप से सम्मानित करने का निश्चय किया और आज लोकरंग के दूसरे दिन मंच पर इनकी संगीत और नृत्य की चमत्कृत कर देने वाली प्रस्तुति हुई। इन बच्चों को विशेष रूप से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया है। विभाग इनको प्रोत्साहन स्वरूप मानदेय भी भेंट करेगा, यह निर्णय संस्कृति सचिव ने लिया।

आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा संयोजित एवं स्वराज संस्थान संचालनालय दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, कला एवं संस्कृति विभाग, मणिपुर शासन के सहयोग से गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनजातीय और लोक कलाओं के 34वें राष्ट्रीय समारोह 'लोकरंग' के दूसरे दिन मध्यप्रदेश के जनजातीय नृत्यों के साथ ही साथ निमाड़ी और पंडवानी गायन की प्रस्तुतियाँ हुईं|

उल्लास अंतर्गत आज दोपहर 2 बजे से हेमंत देवलेकर ने साथी कलाकारों के साथ कई रोचक और प्रेरणादायक किस्से-कहानियों के साथ ही साथ कई कविताएँ भी श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत कीं| जिनमें राजेश जोशी और नवीन सागर की कई रचनाएँ हेमंत देवलेकर ने श्रोताओं को सुनाई| इसी क्रम में 'इबने बतूता पहन के जूता', 'चना किसने बोया जी', 'टके थे दस सेठ जी की छुट गई बस' और गप्प हांक कर देखो प्रमुख रहीं| इस कार्यक्रम की खास बात यह रही की बच्चों और अन्य श्रोताओं को हंसी मजाक में ही जीवन के कठिन पथ पर सकारात्मक रहने और आत्मविश्वास से परिपूर्ण होने की प्रेरणा हेमंत देवलेकर ने अपने साथी कलाकारों के साथ दी| प्रस्तुति के दौरान हेमंत देवलेकर का साथ श्वेता गेतकर, शुभम कटियार, प्रवीण सिंह और हीरा धुर्वे सहित लगभग 17 कलाकारों ने दिया|

इसके पश्चात बी.एच.ई.एल दशहरा मैदान के मुक्ताकाश मंच पर 'लोकराग' अंतर्गत विकास शुक्ला ने अपने साथी कलाकारों के साथ 'निमाड़ी गायन' प्रस्तुत किया| विकास शुक्ला ने अपने गायन की शुरुआत गणेश 'लागु गणपति का पायं' प्रस्तुत कर की| इसके पश्चात कलाकारों ने 'झुलत हिन्दोरना में लाल जू' प्रस्तुत कर सभी दर्शकों को मोह लिए| अपनी प्रस्तुति के अंत में विकास शुक्ला ने संत सिंगाजी केन्द्रित गायन प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया| प्रस्तुति के दौरान विकास शुक्ला का साथ संगतकारों में ढोलक पर रितेश खरे ने, कोरस पर राम निवास खोई और जगदीश खोई ने और मंजीरे पर राजकुमार और रमेश ने दिया|

निमाड़ी गायन के पश्चात 'देशराग' में रितू वर्मा,छत्तीगढ़ ने अपने साथी कलाकारों के साथ 'पंडवानी गायन' प्रस्तुत किया| रितू वर्मा ने अपनी प्रस्तुति में 'द्रोपदी चीरहरण' को अपने गायन के माध्यम से श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति में श्रीकृष्ण के चातुर्य को बड़ी ही खूबसूरती से लयात्मक भाव से कलाकरों ने प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं को मोह लिया| प्रस्तुति के दौरान रितू वर्मा का साथ संगतकारों में हारमोनियम पर उदय राम गन्धर्व ने, तबले पर तारा चंद सारु ने और वेन्जो पर गिरधारी निरमलकर ने संगत की|

पंडवानी गायन के पश्चात ओड़िसा से आये कलाकारों ने समूह में 'शंख वादन' प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति में शंख वादन के साथ ही साथ ढोल, मंजीरा और ढपली आदि के वादन ने दर्शकों को मोह लिया| इस प्रस्तुति में ओड़िसा से आये लगभग 20 कलाकारों ने वादन प्रस्तुत किया| प्रस्तुति के दौरान कलाकारों में राजेंद्र महापात्रा, श्वेत महापात्रा, के.अर्जुन रेड्डी, भगवान साहू और विभूदत्त साहू आदि प्रमुख रहे|

शंख वादन के बाद कलाकारों ने 'धरोहर' अंतर्गत करमा नृत्य प्रस्तुत किया| करमा नृत्य के बाद उत्तराखंड के लगभग 16 कलाकारों ने 'जौनसारी लोक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किया| इस प्रस्तुति का निर्देशन वचन सिंह राणा ने किया| प्रस्तुति के दौरान दमाऊ पर विशाल वर्मा ने, रणसिंघा पर मनोज वर्मा ने, हारमोनियम पर वीरेंदर वर्मा ने साथ दिया| जौनसारी नृत्य के बाद मणिपुर के कलाकारों ने 'लाई हरोबा' नृत्य प्रस्तुत किया| इस नृत्य में स्त्री-पुरुष युद्ध को कल्पित कर अपने हाव भाव नृत्य रूप में प्रस्तुत करते हैं| इस नृत्य को प्रायः ही नई फसल के समय किया जाता है|

इसके पश्चात 'देशांतर' अंतर्गत रशिया से आये सिम्फनी ऑफ रोमानिया, बैंड के कलाकारों ने अपने वाद्य यंत्र वादन से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया| इस दल में लगभग 7 लोगों ने प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें बेलरीना लुशियाना, आइना बोर्शोवा, नादी त्रिचुक, नैना सोस्नोवा, कार्ययाना कोर्निको, हनान और डेल्फिनी ने मंच पर वादन प्रस्तुत किया|

मेला प्रांगण में हुईं प्रस्तुतियाँ

हरदा के मनसा राम ने लगभग 16 साथी कलाकारों के साथ मेला प्रांगण में 'कोरकू गदली' नृत्य प्रस्तुत किया| इस नृत्य में प्रायः ही बाँसुरी और ढोलक की ताल पर नृत्य प्रस्तुत किया जाता है| इस प्रस्तुति में बाँसुरी पर परेश राम और मनसा राम ने, ढोलक पर अनोखे लाल और रामनाथ ने कलाकारों का साथ दिया|

गोपाल सिंह, डिंडौरी ने लगभग 20 कलाकारों के साथ घोड़ी पठाई नृत्य प्रस्तुत किया| नृत्य प्रस्तुति के दौरान टिमकी पर मुन्ना सिंह ने, बाँसुरी पर मोहन सिंह ने और मांदर पर गोपाल सिंह और घासी राम ने संगत की| इसके अतिरिक्त हरियाणा के सुनीता हरयाणवी ने लगभग 15 कलाकारों के साथ लोकगीत 'खोठे चढ़े ललकरूँ' पर नृत्य प्रस्तुत किया| प्रगति माहिते कदम, महाराष्ट्र ने 15 कलाकारों के साथ महाराष्ट्र के लोक नृत्य को मेला प्रांगण में लावनी नृत्य प्रस्तुत किया|

प्रस्तुति के दौरान कई बार दर्शकों और श्रोताओं ने कलाकारों का उत्साह वर्धन करतल ध्वनि से किया|

लोकराग-देशराग

'लोकराग' अंतर्गत 27 से 29 जनवरी प्रतिदिन सायं 4 बजे से प्रस्तुतियाँ होंगी और 'देशराग' अंतर्गत 27 से 29 जनवरी प्रतिदिन सायं 6 बजे से प्रस्तुतियाँ होंगी| 28 जनवरी को 'लोकराग' अंतर्गत ज्ञान सिंह साक्य, भिण्ड अपने साथी कलाकारों के साथ 'लांगुरिया गायन' प्रस्तुत करेंगे| इसके पश्चात 'देशराग' अंतर्गत समन्दर खाँ, राजस्थान अपने साथी कलाकारों के साथ 'मांगणियार गायन' प्रस्तुत करेंगे| 29 जनवरी को 'लोकराग' अंतर्गत शिवरतन यादव, सागर अपने साथी कलाकारों के साथ 'बुंदेली गायन' और विभा शर्मा, भोपाल अपने साथी कलाकारों के साथ 'निमाड़ी गायन' प्रस्तुत करेंगी| इसके पश्चात शीलू राजपूत अपने साथी कलाकारों के साथ 'आल्हा गायन' प्रस्तुत करेंगी।

धरोहर-देशान्तर

'धरोहर' और 'देशांतर' की प्रस्तुतियाँ 27 से 29 जनवरी तक सायं 7 बजे से होंगी| 28 जनवरी को 'धरोहर' अंतर्गत मध्यप्रदेश की सहरिया जनजाति के लोकनृत्य और मणिपुर, हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उड़ीसा और त्रिपुरा के लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी| इसके पश्चात 'देशान्तर' अंतर्गत ईरान से आये कलाकार गायन की कलात्मक प्रस्तुति प्रस्तुत करेंगे| 29 जनवरी को 'धरोहर' अंतर्गत मध्यप्रदेश के 'बरेदी' और 'मटकी' लोकनृत्यों और हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, कर्नाटक, गुजरात और त्रिपुरा के लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी| इसके पश्चात 'देशांतर' अंतर्गत अल्जीरिया से आये कलाकार नृत्य प्रस्तुति प्रस्तुत करेंगे|

क्राफ्ट एवं शिल्प प्रदर्शन

लोकरंग में विविध प्रकार के शिल्पों के मेले की एक विशिष्ट पहचान है। इस बार भी देश के विभिन्न रंज्यों से पारम्परिक शिल्पियों को निमंत्रित किया गया है, जो शिल्प मेले में पारम्परिक शिल्पों की बिक्री व प्रदर्शन करेंगे।

स्वाद

लोकरंग के विशाल परिसर में एक आकर्षण व्यंजन मेले का भी है। इस बार भी इसके अन्तर्गत पहले से ज्यादा अर्थात लगभग 18 हुनरमंद पाक कला में माहिर विभिन्न राज्यों के व्यंजनकार अपने व्यंजनों से लुभायेंगे।

उल्लास

इसके अंतर्गत कठपुतली के खेल छोटे बच्चों के लिए उपलब्ध रहेंगे। कविता एवं कहानी लिखने, बोलने और पढ़ने के आत्मविश्वास के लिए सत्र होंगे। खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा एवं इसके अलावा और भी कई छोटे-छोटे आयामों में बच्चों के मनोरंजन, ज्ञान एवं आनंद के उपक्रम किए जायेंगे।

समारोह के अंतिम दिन 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर ख्यात सूफी गायक हंसराज हंस अपने साथी कलाकारों के साथ सूफी गायन प्रस्तुत करेंगे|


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