लोकरंग - 2019

लोकरंग का हुआ शुभारम्भ


लोकरंग - 26/01/19 | लोकरंग - 27/01/19 | लोकरंग - 28/01/19 | लोकरंग - 29/01/19 |


आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा संयोजित एवं स्वराज संस्थान संचालनालय दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, कला एवं संस्कृति विभाग, मणिपुर शासन के सहयोग से गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनजातीय और लोक कलाओं के 34वें राष्ट्रीय समारोह 'लोकरंग' का शुभारम्भ पी.सी.शर्मा माननीय मंत्री, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, जनसम्पर्क, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, विमानन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग, रेनू तिवारी, संस्कृति सचिव और अनिल कुमार निदेशक, आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश ने दीप प्रज्वलित कर किया|

इस अवसर पर ही गणतंत्र दिवस समारोह लाल परेड में परेड प्रदर्शन, लोकनृत्य व झाँसी के पुरस्कारों का वितरण भी किया गया| सैन्य दल में विशेष सशस्त्र बल प्रथम, सी आई एस एफ द्वतीय व जेल विभाग तृतीय रहे| असैन्य दल में ऐन सी सी एयर विंग प्रथम, आर्मी विंग को द्वतीय व शौर्य दल को तृतीय पुरस्कार मिला| कोरकू भील और भारिया जनजातीय के नृत्य प्रदर्शन को पुरुस्कार मिला| झाँकी प्रदर्शन में प्रथम पुरातत्व विभाग, द्वतीय पर्यटन निगम तथा तृतीय महिला एवं बाल विकास पुरस्कृत हुईं| गृह विभाग पुलिस की झाँकी को प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ|

शुभारम्भ अवसर पर आज गोण्ड आख्यान आधारित समवेत नृत्य-नाटिका 'रामायनी' का मंचन सुमन साहा के निर्देशन में हुआ|

मध्यप्रदेश की एक प्रमुख जनजाति है गोंड, जिसमें गोंड रामयनी के रूप में यह कथा पुरातन काल से प्रचलित है, जिसका मूल आधार रामायण है। सात अध्यायों में विभक्त इस कथा में राम तो राजा हैं ही, परन्तु नायक लक्ष्मण हैं। राम और सीता सुखपूर्वक अयोध्या में अपने अपने महल में निवास कर रहे हैं परन्तु लक्ष्मण अपने महल में तपस्या रत हैं। भाभी मां सीता की प्रमुख चिंता है कि लक्ष्मण का ब्याह हो। वह अक्सर स्वप्न देखती हैं और फिर लक्ष्मण को आदेशित करती हैं कि वो जाकर उस कन्या से ब्याह करके महल ले आएं। इस तरह से लक्ष्मण विभिन्न प्रकार के पराक्रमों को करते हुए कभी ब्याह करके लौटते हैं तो कभी असफल भी होते हैं।

लक्ष्मण और इंद्रकामिनी, भाग १ व भाग २, लक्ष्मण और तिरियाफूल, लक्ष्मण और मचला दई, लक्ष्मण और रानी फुफैया, लक्ष्मण और बीजुलदई और सीता वनवास, इन सात अध्यायों में विभक्त रामायनी की कथा प्रचलित राम कथा से काफी भिन्न है और इसकी कथा का आरंभ रावण वध के बाद होता है। कथा काफी रोचक है और नाटकीयता से परिपूर्ण है। इसका नाट्य रूपांतरण योगेश त्रिपाठी ने किया है और समवेत नृत्य-नाट्य के रूप में इसे मंच पर प्रस्तुत किया, कोलकाता के कोरियोग्राफर सुमन साहा ने। मंच पर सूत्रधार की भूमिका में वरिष्ठ रंगकर्मी और सिने अभिनेता राजीव वर्मा रहे। यह नाटय धवान्यांकित ट्रैक दर्शकों के सम्मुख प्रस्तुत किया गया|

प्रस्तुति के दौरान मंच पर लक्ष्मी नारायण, राजीव वर्मा, अपूर्वा दत्ता मिश्रा, दिव्यांशी, पूजा मालवीय, राखी श्रद्धा, सिमरन, मांडवी, स्वर्णिमा, साक्षी, नंदिनी, शालिनी मलुईया, सोनम उपाध्याय, बहुबंशु, अनमोल, प्रतीक, हरीश शर्मा, सरस, शिवम् पुष्पेंद्र, विकाश जोठे, आयुष, निहाल, सिद्धार्थ, आशीष, अमित, आकांशा, हर्ष, शिवम्, अनमोल, निहाल आशीष, रमेश, अंकित पारोचे, इशिता, राखी, दीपू, मनीष, सुनीता अहिरे और आकृति जैन आदि कलाकारों ने प्रस्तुति के दौरान अपने नृत्याभिनय कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया|

इस प्रस्तुति की प्रकाश परिकल्पना सौमेन चक्रबोर्ती ने, मेकअप में सीमा मौर्या, मनीष गायकवाड़, साधना सिंह पवार और शराफत अली ने, मंच व्यवस्था में केनल कौशिक ने, वेशभूषा में रश्मि आचार्य ने, सहनिर्देशन में रिक अमृत ने और कोरियोग्राफी मेंहृदय पॉल, संचारी मुख़र्जी, पलाश देबनाथ और अंकुर घोष ने, बैकस्टेज से शरद बाजपेयी, शुभम उपाध्याय, शिवजी यूले, हिमांशी, ऋतू, विकास जोठे, योगेश जोठे, योगेश चौहान, अंकित शिवबीकार, रचित सक्सेना और गौरब सराठे ने, संगीत निर्देशन व परिकल्पना में दिशारी चक्रबोर्ती ने सहयोग किया|

प्रस्तुति के दौरान कई बार दर्शकों और श्रोताओं ने कलाकारों का उत्साह वर्धन करतल ध्वनि से किया|

लोकराग-देशराग

'लोकराग' अंतर्गत 27 से 29 जनवरी प्रतिदिन सायं 4 बजे से प्रस्तुतियाँ होंगी और 'देशराग' अंतर्गत 27 से 29 जनवरी प्रतिदिन सायं 6 बजे से प्रस्तुतियाँ होंगी| 27 जनवरी को 'लोकराग' अंतर्गत विकास शुक्ला, हरदा अपने साथी कलाकारों के साथ 'निमाड़ी लोक गायन' की प्रस्तुति देंगे| इसके पश्चात 'देशराग' अंतर्गत रितु वर्मा, छत्तीगढ़ अपने साथी कलाकारों के साथ 'पंडवानी लोक गायन' प्रस्तुत करेंगी| 28 जनवरी को 'लोकराग' अंतर्गत ज्ञान सिंह साक्य, भिण्ड अपने साथी कलाकारों के साथ 'लांगुरिया गायन' प्रस्तुत करेंगे| इसके पश्चात 'देशराग' अंतर्गत समन्दर खाँ, राजस्थान अपने साथी कलाकारों के साथ 'मांगणियार गायन' प्रस्तुत करेंगे| 29 जनवरी को 'लोकराग' अंतर्गत शिवरतन यादव, सागर अपने साथी कलाकारों के साथ 'बुंदेली गायन' और विभा शर्मा, भोपाल अपने साथी कलाकारों के साथ 'निमाड़ी गायन' प्रस्तुत करेंगी| इसके पश्चात शीलू राजपूत अपने साथी कलाकारों के साथ 'आल्हा गायन' प्रस्तुत करेंगी।

धरोहर-देशान्तर

'धरोहर' में मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों के जनजातीय एवं लोकनृत्यों का प्रदर्शन किया जाता है, वहीं 'देशान्तर' में विदेशी सांस्कृतिक कलारूपों में संगीत एवं नृत्यों की प्रस्तुतियाँ होती हैं। 'धरोहर' में इस बार मध्यप्रदेश सहित मणिपुर, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, उड़ीसा और त्रिपुरा राज्यों की आंचलिक संस्कृति की झलक देखी जा सकेगी। 'देशान्तर' में प्रतिदिन विदेशी सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियाँ होंगी।

'धरोहर' और 'देशांतर' की प्रस्तुतियाँ 27 से 29 जनवरी तक सायं 7 बजे से होंगी| 27 जनवरी को 'धरोहर' अंतर्गत मध्यप्रदेश के बैगा और कोरकू जनजातियों के लोकनृत्यों और मणिपुर, उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात और उड़ीसा के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी| इसके पश्चात 'देशांतर' अंतर्गत रशिया से आये सिम्फनी ऑफ रोमानिया, बैंड के कलाकार अपने गायन की कलात्मक प्रस्तुति प्रस्तुत करेंगे| 28 जनवरी को 'धरोहर' अंतर्गत मध्यप्रदेश की सहरिया जनजाति के लोकनृत्य और मणिपुर, हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उड़ीसा और त्रिपुरा के लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी| इसके पश्चात 'देशान्तर' अंतर्गत ईरान से आये कलाकार गायन की कलात्मक प्रस्तुति प्रस्तुत करेंगे| 29 जनवरी को 'धरोहर' अंतर्गत मध्यप्रदेश के 'बरेदी' और 'मटकी' लोकनृत्यों और हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, कर्नाटक, गुजरात और त्रिपुरा के लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी| इसके पश्चात 'देशांतर' अंतर्गत अल्जीरिया से आये कलाकार नृत्य प्रस्तुति प्रस्तुत करेंगे|

क्राफ्ट एवं शिल्प प्रदर्शन

लोकरंग में विविध प्रकार के शिल्पों के मेले की एक विशिष्ट पहचान है। इस बार भी देश के विभिन्न रंज्यों से पारम्परिक शिल्पियों को निमंत्रित किया गया है, जो शिल्प मेले में पारम्परिक शिल्पों की बिक्री व प्रदर्शन करेंगे।

स्वाद

लोकरंग के विशाल परिसर में एक आकर्षण व्यंजन मेले का भी है। इस बार भी इसके अन्तर्गत पहले से ज्यादा अर्थात लगभग 18 हुनरमंद पाक कला में माहिर विभिन्न राज्यों के व्यंजनकार अपने व्यंजनों से लुभायेंगे।

उल्लास

इसके अंतर्गत कठपुतली के खेल छोटे बच्चों के लिए उपलब्ध रहेंगे। कविता एवं कहानी लिखने, बोलने और पढ़ने के आत्मविश्वास के लिए सत्र होंगे। खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा एवं इसके अलावा और भी कई छोटे-छोटे आयामों में बच्चों के मनोरंजन, ज्ञान एवं आनंद के उपक्रम किए जायेंगे।

समारोह के अंतिम दिन 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर ख्यात सूफी गायक हंसराज हंस अपने साथी कलाकारों के साथ सूफी गायन प्रस्तुत करेंगे|


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