लोकरंग - 2019

लोकरंग के समापन अवसर पर सूफी गायन रहा आकर्षण का केंद्र (30/01/19)


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लोकरंग के समापन अवसर पर सूफी गायन रहा आकर्षण का केंद्र

आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा संयोजित एवं स्वराज संस्थान संचालनालय दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, कला एवं संस्कृति विभाग, मणिपुर शासन के सहयोग से गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनजातीय और लोक कलाओं के 34वें राष्ट्रीय समारोह 'लोकरंग' में आज समापन अवसर पर हंसराज हंस ने साथी कलाकरों के साथ सूफी गायन की मोहक प्रस्तुति प्रस्तुत की|

उल्लास

उल्लास अंतर्गत आज दोपहर 2 बजे से सोपान जोशी ने विस्तार से महात्मा गाँधी के जीवन पर चर्चा की और 'स से सांप' कहानी बच्चों और श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की| 'स से सांप' कहानी के केंद्र में गाँधी जी हैं, जो बच्चों को कहानी सुना रहे हैं| उसी समय पास के एक घर में, जहाँ एक बुढ़िया रहती थी| उसके घर में एक सांप घुस जाता है| अतः गाँव वाले उस सांप को मार देते हैं| बुढ़िया उस सांप को नहीं जलाती, बल्कि अपनी ही छत पर रख देती है| कुछ समय बाद एक चील आती है, वह अपने पैरों में मोतियों की माला लिए होती है| सांप को देखते ही वह मोतियों की माला को वहीँ छोड़कर सांप को ले जाती है| इस कहानी से सोपान जोशी ने बच्चों और श्रोताओं को जीवन का मूल्य और मरे हुए शरीर का भी मूल्य होता है, यह समझाने का प्रयास किया| इस कहानी के बाद सोपान जोशी ने एक किस्सा 'फ से फूटबाल' श्रोताओं को सुनाया| इस 'फ से फूटबाल' किस्से में सोपान जोशी ने बताया की किस तरह गाँधी जी ने फूटबाल खेल से भारत की विभिन्न जातियों, धर्मों और प्रान्तों के लोगों को अपने साथ जोड़ा| इस किस्से से सोपान जोशी ने सभी श्रोताओं और बच्चों को खेल के महत्त्व के बारे में विस्तार से बताया| सोपान जोशी के बाद स्वयं प्रकाश ने गाँधी जी के बचपन की चर्चा करते हुए, 'इम्मी' की कहानी बच्चों और श्रोताओं को सुनाई| इस कहानी में इम्मी गरीब घर का एक छोटा लड़का है, जिसे पढाई से ज्यादा खेलकूद में रूचि है| अतः वह अपना भविष्य भी खेलकूद में बनाना चाहता है| इस कहानी के माध्यम से स्वयं प्रकाश ने बच्चों और श्रोताओं को बताया कि पढ़ाई के साथ ही साथ खेलकूद भी जरुरी है|

कार्यक्रम के अंत में हिमांशु वाजपेयी ने महात्मा गाँधी के जीवन और उनके आदर्शों की विस्तार से चर्चा की| अतः उन्होंने गाँधी जी के सत्य और अहिंसा के आदर्शों को बच्चों को समझाने का प्रयास किया| उन्होंने बताया कि गाँधी जी को भारतीय परम्पराओं और सांस्कृतिक भिन्नता पर बहुत गर्व था| अतः गाँधी जी साफ़-सफाई पर बहुत ध्यान देते थे| हिमांशु वाजपेयी ने बच्चों और सभी श्रोताओं को सत्य और अहिंसा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया| हिमांशु वाजपेयी ने बच्चों को आम की कहानी भी सुनाई| इस कार्यक्रम की खास बात यह रही की, बच्चों और अन्य श्रोताओं को जीवन के कठिन पथ पर सकारात्मक रहने और आत्मविश्वास से परिपूर्ण होने की प्रेरणा मिली|

लोकरंग में आज महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर ख्यात सूफी गायक हंसराज हंस ने अपने साथी कलाकारों के साथ सूफी गायन प्रस्तुत किया| उन्होंने गायन की शुरुआत 'प्यार है सुर से जिसको, सुर इन्सान बना देता है, सुर रहमान मिला देता है' गीत प्रस्तुत कर की| इसके पश्चात क्रमशः 'उसने कहा तू कौन है, मैंने कहा सजदा तेरा', 'मैंने तो समझा था कि मेरा यार' और 'तोड़े दिल मेरा शौक से तोड़, चीज मेरे नहीं तुम्हारी है' गीत प्रस्तुत किये| इसके बाद साथी कलाकारों के साथ हंसराज हंस ने फ़िल्म कच्चे धागे का गीत 'इश्क दी गली विच कोई कोई लंगदा' प्रस्तुत कर सभी दर्शकों को मोह लिया| हंसराज हंस ने अपनी प्रस्तुति के अंत में 'नित खैर मंगदा सोणियां मै तेरी' और 'छाप तिलक सब छीनी रे' के साथ ही साथ अन्य गीत प्रस्तुत करते हुए अपनी गायन प्रस्तुति को विराम दिया|

गायन प्रस्तुति के दौरान हंसराज हंस का साथ संगतकारों में वायलिन पर युनुस वारसी ने, की-बोर्ड पर नरेश कुमार ने, बेन्जो पर चुना खां ने, बेकअप कोरस पर राणा, कश्मीर मोहम्मद और माधव ने, तबले पर सादिक अली ने, ओक्टोपेड पर मोहन कुमार ने और ढोलक पर जसवंत ने संगत की|

हंसराज हंस लम्बे समय से गायन-वादन के क्षेत्र में सक्रीय हैं| हंसराज हंस ने अपने गायन-वादन की कई प्रस्तुतियाँ देश के विभिन्न कला मंचों पर दी है|

प्रस्तुति के दौरान कई बार दर्शकों और श्रोताओं ने कलाकारों का उत्साह वर्धन करतल ध्वनि से किया|


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