तुलसी एवं अहिल्या अवार्डों का अलंकरण

जनजातीय संग्रहालय की वर्षगाँठ में तुलसी एवं अहिल्या अवार्डों का अलंकरण

जनजातीय संग्रहालय का स्थापना दिवस समारोह

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय की चैथी वर्षगाँठ का छः दिवसीय समारोह आज से प्रारम्भ हुआ। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के प्रतिष्ठा सम्मानों राष्ट्रीय तुलसी एवं देवी अहिल्या सम्मानों का अलंकरण समारोह भी सम्पन्न हुआ।

संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने इस अवसर पर देश के आठ शीर्षस्थ कलाकारों को अलंकरण प्रदान किए। इनमें तुलसी सम्मान से भीली चित्रकार पेमा फत्या, मालवा के लोकनाट्य माच के गुरु पण्डित ओमप्रकाश शर्मा, महाराष्ट्र के लोक कलाकार प्रभाकर वरलीकर एवं गुजरात के लोकगायक भीखूदान गढ़वी को विभूषित किया गया। इसी प्रकार देवी अहिल्या सम्मान से लखनऊ की लोकगायिका कमला श्रीवास्तव, उत्तराखण्ड की लोकगायिका बसंती बिष्ट, इन्दौर की चित्रकार मीरा गुप्ता एवं नारायणपुर बस्तर की आदिवासी गायिका रगबती बघेल को विभूषित किया गया। सभी कलाकारों को दो-दो लाख रुपये की आयकरमुक्त राशि एवं सम्मान पट्टिका, शाल-श्रीफल प्रदान किए गये।

सम्मान ग्रहण करने के पश्चात उर्मिला श्रीवास्तव एवं बसंती बिष्ट का गायन भी हुआ। उर्मिला जी ने अवधी गायन में पारम्परिकता का श्रेष्ठ प्रस्तुत किया वहीं बसंती बिष्ट ने उत्तराखण्ड की प्रचलित पौराणिक कथाओं का गायन किया। इसके पश्चात कोरियोग्र्राफर चन्द्रमाधव बारीक की भव्य प्रस्तुति करमा का प्रदर्शन हुआ जिसमें मध्यप्रदेश और उड़ीसा के सौ से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया।

दिन में जनजातीय संग्रहालय परिसर में शिल्प मेला प्रारम्भ हुआ। यहाँ विभिन्न माध्यमों में काम करने वाले शिल्पकार आये हैं और 11 जून तक प्रस्तुति एवं विक्रय करेंगे। आज ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एंकरिंग की कार्यशाल का भी आरम्भ हुआ जो छः दिन चलेगी। इस कार्यशाला में तीस से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

जनजातीय संग्रहालय की वर्षगाँठ समारोह के दूसरे दिन 7 जून को संगाती के रूप में जनजातीय एवं आधुनिक नृत्य-संगीत की यात्रा एकाग्र समन्वित प्रस्तुति होगी। इसी अवसर पर तुलसी सम्मान से सम्मानित कलाकार भीखूदान गढ़वी का लोकगायन एवं ओमप्रकाश शर्मा की माच शैली में लोकनाट्य राजा रिसालू का मंचन होगा। कार्यक्रमों में प्रवेश निशुल्क है।

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