अभिनयन - प्रत्येक शुक्रवार

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अभिनयन में हुआ नाटक अंत भला तो सब भला का प्रदर्शन (14/09/18)

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नवीन रंगप्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला 'अभिनयन' में आज पुनीत विक्रम त्रिवेदी के निर्देशन में नाटक 'अंत भला तो सब भला' का मंचन संग्रहालय सभागार में हुआ|

इस नाटक में बुंदेली शैली की नौटंकी को मंच पर प्रस्तुत किया गया, इसमें कलाकारों ने बुंदेली गायकी में बेहरत, मारवाड़ी, लावणी आदि के संगीत के साथ अभिनय से सजी नाट्य प्रस्तुति प्रस्तुत की| नाटक सत्यवादी राजा अन्जान सिंह के त्याग पर आधारित है| इस कथा में राजा अपना राजपाठ अपने पुत्र को सौंप कर, वन में चला जाता है| राजा का पुत्र भारतसिंह अपने राज में निति एवं सत्यनिष्ठा से शासन चलाता है| इसी बीच वह अपनों के ही षड्यंत्र में फंस जाता है| लेकिन राजा अपने पिता द्वारा सिखाई निति, विनम्रता, सत्यता और धैर्य रखते हुए सभी मुश्किलों का सामना करता है और जीत हासिल करता है| अतः अपने राज्य के कल्याण में लग जाता है| इस नाटक के अंत में मंत्री सभा में कहते हैं कि महाराज सत्य प्रताड़ित तो हो सकता है, पर पराजित कभी नहीं हो सकता, आपने यह साबित कर दिया| क्यों न अब उन षड्यंत्रकारियों को सजा दी जाये? तब राजा कहते हैं कि नहीं 'अंत भला तो सब भला' सजा की आवश्यकता नहीं है|

इस नाटक में मंच पर राजेश पूरी, हरिसिंह ठाकुर, प्राण सिंह ठाकुर, मनीष शर्मा, धीराम ठाकुर, केशव तिवारी, प्रज्ञान शर्मा, बहादुर ठाकुर, सोहन ठाकुर, सौरभ पुरी, बसौरी पूरी, प्रियंका दीक्षित, रोहित पुरी, पिल्लू रजक, राजेन्द्र यादव, चतुर सिंह, विजय यादव, जय तिवारी और वीरेंद्र कहार आदि ने अपने अभिनय से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया| इस नाटक का लेखन प्रमोद शुक्ला ने, वस्त्र विन्यास में वत्सला त्रिवेदी ने, मंच सामग्री में जागेश्वर प्रजापति ने, प्रकाश परिकल्पना में आशीष साहू ने, समूह समन्वय में रचना त्रिवेदी ने, मुख सज्जा में मनीष कोरी ने, संगीत में राजेश पुरी ने सहयोग किया| इस नाटक का निर्देशन पुनीत विक्रम त्रिवेदी ने किया| पुनीत विक्रम त्रिवेदी कई वर्षों से रंग कर्म के क्षेत्र से जुड़े हैं| पुनीत विक्रम त्रिवेदी ने कई नाटकों में अभिनय करने के साथ ही साथ कई नाटकों का निर्देशन भी किया है|


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