अभिनयन - प्रत्येक शुक्रवार

अभिनयन - प्रत्येक शुक्रवार

अभिनयन‘ श्रृँखला अन्तर्गत नाटक 'एकलव्य'' का मंचन हुआ(18/08/2017)

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में प्रत्येक शुक्रवार को आयोजित नवीन रंगप्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला ‘अभिनयन’ के अन्तर्गत 18 अगस्त, 2017 को श्री नीरज कुंदेर, द्वारा निर्देशित नाटक ‘एकलव्य‘ का मंचन इन्द्रावती नाट्य समिति, सीधी के कलाकारों द्वारा किया गया।

एकलव्य-महाभारत, हरिवंश पुराण एवं लोक मिथक के आधार पर नरेन्द्र सिंह द्वारा लिखित मौलिक नाट्य रचना है। नाटक का प्रारंभ वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सूत्रधारों के वार्तालाप से होता है तद्उपरांत एकलव्य के बड़े बेटे (जरा) द्वारा कृष्ण का मारा जाना। महाभारत युद्ध के बाद की वीभत्सता और कृष्ण के प्रति आमजन में उससे उपजे क्षोभ को प्रस्तुत करता यह नाटक जरा के कथावाचक होने की कथा तक पहुंचता है। जरा एकलव्य की कथा कहना शुरू करता है और धीरे-धीरे यह प्रवाह में आती है। एकलव्य का बचपन, यज्ञोपवित संस्कार, गुरू द्रोणाचार्य के पास धनुर्विद्या सीखने के लिए जाना, द्रोणाचार्य का मना करना, एकलव्य का वेणु के पास आकर गुरू द्रोणाचार्य की मूर्ति बनाकर अभ्यास करना, द्रोणाचार्य का एकलव्य से गुरूदक्षिणा में अगूंठा मागना, एकलव्य का पुनः अभ्यास कर दो अंगुली से तीर चालाना सीखना। वेणु के कहने पर द्रोपदी के स्वयंवर में जाना, कृष्ण और एकलव्य का युद्ध और एकलव्य का मारा जाना। युद्ध में एकलव्य की मृत्यु के साथ नाटक समाप्त होता है।

मंच पर - सूत्रधार वरिष्ठ-करूणा सिंह, सूत्रधार कनिष्ठ-शिवनारायण कुंदेर, एकलव्य-पवन मनोज इन्द्रेकर, वेणु-दीप्ति पटेल, जरा-नरेन्द्र बहादुर सिंह, द्रोणाचार्य-रोशनी प्रसाद मिश्र, जर्जर-अंबर तिवारी, परमहंस-संतोष कुमार द्विवेदी, हिरन्यधनु-मयंक पाठक, सुलेखा-सुनैना, निशा-मनीष यादव, पांच पांडव-राज सोनार्तिया, मनीष यादव, अंबर तिवारी, मयंक पाठक, संतोष द्विवेदी, सुनैना, दीप्ति पटेल, शिवनारायण कुंदेर, करूणा सिंह आदि

मंच परे - आलेख एवं संगीत-नरेन्द्र बहादुर सिंह, प्रकाश परिकल्पना-मेनुल, मंच निर्माण-अंबर तिवारी, मार्ग दर्शक-श्री संजय उपाध्याय।


अगस्त - 2017 में प्रदर्शन

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